Wednesday, 28 December 2016


राह जीवन की मुश्किल बड़ी हे मगर
जैसे गुज़री हुई इक घड़ी ये डगर
जीना है साथ सुख दुःख के हाथ में
आड़ी तिरछी लकीरो का है ये सफर
Copyright@डॉ मोहन बैरागी

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